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Sanghsadhna



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स्वयंसेवकों के हाथों में होगा अब माउस

Tue, 21 Feb 2012 11:51:00 +0000

साभार दैनिक भास्‍कर, रायपुर अंक, 21.02.2012
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संस्कृतभारती द्वारा 'सरला' परीक्षा का अ.भा. स्तर पर सफल आयोजन

Thu, 16 Feb 2012 12:20:00 +0000

श्रीश देवपुजारी
भारत में प्रथम बार संस्कृतभारती ने संस्कृत भाषा में विद्यार्थियोंकी रूचि बढ़ाने हेतु एक अखिल भारतीय परीक्षा का आयोजन किया. उसका परिणाम भी अप्रत्याशित है. ११ प्रान्तोंमे प्रथम प्रयास में सम्पन्न 'सरला' परीक्षा में ८२३ विद्यालायोंके ७९४०४ विद्यर्थियोने भाग लिया. अगले वर्ष यह परीक्षा भारत के सभी प्रान्तोंमे सम्पन्न करने का संकल्प संस्कृतभारती की अखिल भारतीय बैठक में लिया गया. दिनांक ११, १२ फ़रवरी २०१२ को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू शहर में सम्पन्न हुई  इस बैठक में १९ राज्योंके अध्यक्ष, मंत्री, सहमंत्री और संगठन मंत्री उपस्थित थे.
                    आने वाले वर्ष में युवाओंको संगठन के साथ जोड़ना, पढाना और पढ़ना, पढाने के लिए कुशल शिक्षकोंका निर्माण - इस त्रिसूत्री पर काम  करनेका भी संकल्प किया गया. पूरे देशभर में २४ प्रशिक्षण शिबिर लगाये गए जिनमे १६८६ नये शिक्षकोंका प्रशिक्षण हो पाया.
                  आधुनिक तंत्रज्ञान का आधार संस्कृत के प्रचार के लिए करने हेतु संस्कृत भारती के प्रयत्नोंसे गत एक वर्ष के कालावधि में संस्कृत विकिपीडिया में ८ हजार से अधिक पृष्ठोंका साहित्य डाला गया. इतनी काम कालावधि में किसी भी भाषा का इतना साहित्य अबतक उपलोड नहीं हुआ है. सब जानते ही है की विकिपीडिया यह विश्व कोष अंतरताने पर सब के लिए उपलब्ध है. 
                  अखिल भारतीय बैठक के निमित्त आयोजित कुल्लू के नगरिकोंकी सभा में मुख्य वक्ता के रूप में भाषण देते हुए चमू कृष्ण शास्त्री ने एक सूत्र सभी उपस्थित संस्कृत अनुरागियोंको दिया - 'संस्कृतं व्यक्तिविकासाय, राष्ट्रविकासाय च '! उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा की 'संस्कृत यह ज्ञान भाषा है और ज्ञान के बल पर ही विकास संभव है . इसलियें न तो केवल पश्चिम के और न केवल पौरवात्य ज्ञान के बल पर किसीका विकास  होगा, बल्कि दोनों ज्ञान भंडार जिसके पास होंगे वही विकास की दौड़ में आगे निकलेगा.' भारत के नाम का अर्थ ही है ' ज्ञान में जो रत, वह भारत.'  उन्होंने विश्व भर के उदाहरण देते हुए यह प्रतिपादित किया की विदेशियोंकी रूचि संस्कृत में बढ़ रही है. यद्यपि प्रधान मंत्री वैश्विक संस्थानोंमे कार्यरत थे फिर भी उन्होंने जानेवारी मास में हुए विश्व संस्कृत संमेलन  के उद्घाटन भाषण में अपना मूल अंगरेजी भाषण पढ़नें के पहले स्वयं की आन्तरिक आवाज को उद्घाटित किया. उनका वाक्य था - संस्कृत भारत की आत्मा है. सभा का सञ्चालन जिला भाषाधिकारी डा. सीताराम ठाकुर ने किया. सभा को संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष  डा. चान्द्किरण सलूजा ने भी संबोधित किया. सभा में कुल्लू के राजा और पूर्व सांसद श्री महेश्वर्सिंह भी उपस्थित थे.
                   बैठक में जो वृत्त संकलित हो पाया उसके अनुसार भारत के ३१५ जिलोंमे २७१४ स्थानोंपर संस्कृतभारती का काम चल रहा है. अखिल भारतीय बैठक कुल्लू के देवभवन में सम्पन्न हुई. बैठक की सफलता के लिए कुल्लू के देवता रघुनाथजी की विशेष पूजा की गयी जिसमे राजमाता स्वयं उपस्थित थी.
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संघ की शाखा अब ऑनलाइन

Sun, 12 Feb 2012 19:25:00 +0000

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इस्राइल से सीखे भारत |

Mon, 03 Oct 2011 14:24:00 +0000

इस दुनिया में इस्राइल का नाम कौन नही जानता | इस्राइल अपनी कथनी को करनी में बदलता ही नही हैं वरन अपने फैसले के प्रति पूरा देश दृढ़ संकल्प रहता है अभी हाल ही में 27/12/2008 को इस्राइल में 70 रॉकेट फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमास के द्वारा दागा गया, जिससे भारी नुक्सान हुआ और इस घटना के तुंरत बाद इस्राइल के विभिन्न राजनैतिक डालो के नेता संसद में एकमत होकर बहुत ही आक्रामक तरीके से विरोध किया और तुंरत जवाबी कारवाई करने को इस्राइली वायु सेना को निर्देश दिया गया | आदेश मिलते ही इस्राइली वायु सेना ने गाजा में दनादन हवाई हमला किया और अब तक लगभग 772 लोगो की जाने जा चुकी है जिसमे हमास के कई बड़े नेता भी शामिल है | उधर इस्राइल की इस कारवाई के बाद पूरा विश्व समुदाय सकते में है | इरान एवं अरब समूह के कई देश इस हवाई हमला को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् पर लगातार दबाव bana रहे है कुछ युरोपिय देश जैसे फ्रांस एवं चीन ने भी इस हवाई हमला को रोकने के लिए कहा मगर हवाई हमला को बंद करने के बजाय जमीनी युद्ध की कारवाई करने को इस्राइल ने कहकर इन सभी देशो की पश्चिम एशिया में शान्ति की अपील खारिज कर दी इस्राइल के रक्षा मंत्री ने बड़े स्पष्ट शब्दों में फिलिस्तीन एवं विश्व समुदाय से कहा की वह गाजा पर हमला तभी रोकेगा जब हमास, इस्राइल पर हमला ना करने की शर्त रखे |
यहाँ आपको यह बताते चले की, इस्राइल और भारत में काफी समानताये है | जैसे इस्राइल भी दुनिया का एकमात्र देश है, जो चारो तरफ़ अपने दुश्मनों (इस्लामिक देशो) से घिरा है, और भारत के भी चारो दिशाओ में दुश्मन राष्ट्र जैसे (पकिस्तान, चीन, बांग्लादेश) देशो से घिरा है | मगर राष्ट्र के प्रति तन-मन-धन से उसका विकास एवं रक्षा करना भारत की अपेक्षा इस्राइल के लोगो में ज्यादा है | इस्राइल और भारत दोनों में प्रायोजित आतंकवाद (जिहाद) विगत कई वर्षो से चल रहा है, लेकिन इसको कुचलने में इस्राइल में इस्राइल ने भारत से ज्यादा तत्परता दिखाई और परिणाम पूरा विश्व देख रहा है | एक ओर जहाँ भारत लगातार एक के बाद एक बड़ी आतंकवादी घटनाये झेल रहा है, तो इस्राइल में आतंकवादियों के मनोबल में गिरावट आई है, और बड़ी - बड़ी आतंकी घटनाये भी बहुत कम हुई है | चुकी भारत और इस्राइल दोनों विकासशील देश है | दोनों देशो को अपनी राष्ट्रीय आय का अधिकांश हिस्सा सेना के ऊपर खर्च करना पड़ता है | ऐसा नही है की, हमारी सेना आतंकवाद को ख़तम नही कर सकती है | बल्कि भारतीय वायु सेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है | विश्व की दूसरी बड़ी थल सेना है | जल सेना में भी हम किसी से कम नही है | टेंको और मिसाइलों की तकनीक भी बदली है, और इसको और घातक एवं धारदार बनने का प्रयास चल रहा है कमी है, तो हमारे देश के नेताओ के सोच में हैं वोट बैंक की लालच ने इन नेताओ को इतना अँधा कर दिया है, की उनको राष्ट्र की अखंडता और सुरक्षा के प्रति न सिर्फ़ आँख मूंद कर बैठे है, ऐसे - ऐसे मुददों को भी वे राजनीति का रंग चढाने में जरा भी शर्म महसूस नही करते है | यहाँ एक बात और भी बताता चलूं की, सबसे बड़ी खराबी, लचीलापन हमारे विदेश नीति में है | आज जरुरत है, राष्ट्र को एक स्पष्ट विदेश नीति की, जिसमे राष्ट्र के साथ खेलवाड़ करने वाले प्रायोजित आतंकवादी गुट या देश के विरुद्ध कड़ी कारवाई से निपटा जाए |

आलेख - कन्हैया दुबे
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इंडोनेशिया के हिन्दू इतिहास में जुड़ा नया अध्याय

Mon, 03 Oct 2011 14:19:00 +0000

पूवी ईशांत देश इंडोनेशिया आज एक ईस्लामिक देश है और यहाँ मुस्लिम जनसंख्या सर्वाधिक है, परंतु इस देश का इतिहास भी हिन्दू धर्म की गौरवगाथा का प्रमाण पेश करता है. और अब खुदाई के दौरान दिखे एक अति प्राचीन मंदिर के अवशेष इस देश के हिन्दू इतिहास में कई नए तथ्य जोड़ सकता है.

इंडोनेशिया के योगकर्ता शहर के ईस्लामिक विश्वविद्यालय में नए पुस्तकालय की नीवं डालने के लिए खुदाई शुरू की गई तो पता चला कि वहाँ की जमीन स्थिर नहीं है. मजदूरों ने सावधानीपूर्वक और अधिक खुदाई की तो एक प्राचीन मंदिर की दिवारें दिखाई दी. इसके बाद तेज वर्षा की वजह से मंदिर की पृष्ठभूमि और गर्भगृह दिखाई दिया जहाँ भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित थी.

इसके बाद इस स्थान का कब्जा इंडोनेशिया के पुरातत्व विभाग ने ले लिया. कुछ सप्ताह की खुदाई के बाद पता चला है कि यह मंदिर करीब 1000 वर्ष पुराना है. अब पुरातत्व विभाग ने इसे अमूल्य धरोहर घोषित कर दिया है. पुरातत्व विभाग का मानना है कि यह मंदिर इंडोनेशिया में ईस्लाम के प्रवेश से पहले की संस्कृति के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कर सकता है.

क्यों है यह मंदिर महत्वपूर्ण?

अभी तक इंडोनेशिया में खुदाई के दौरान कोई साबुत मंदिर नहीं मिला था. लेकिन यह पहला मंदिर है जो अपनी वास्तविक स्थिति में है. पुरातत्व विभाग के डॉ. बुद्धि सानकोयो के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि यह मंदिर अभी भी अपनी मूल स्थिति में है और सभी मूर्तियाँ भी अपने मूल स्थान पर है.

अब इस स्थान पर गणेश की मूर्ति के अलावा शिवलिंग, नंदी गाय और कई अन्य मूर्तियाँ भी मिली है.

डॉ. बुद्धि का मानना है कि 10वीं सदी में किसी ज्वालामुखी के फटने से यह मंदिर उसके लावा में दब गया होगा और उसी लावा की वजह से इतने वर्षों के बाद भी सुरक्षित रह पाया होगा.

अभी इस मंदिर की खुदाई और सरंक्षण का कार्य चल रहा है और बाद में इसे आम जनता के लिए खोला जाएगा.

इंडोनेशिया के इतिहास में हिन्दू:

इंडोनेशिया द्वीपसमूह सातवीं शताब्दी से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है. यहाँ के शासक पश्चिमी देशों के साथ व्यापार व्यवहार करते थे. सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच वे हिन्दू और बोद्ध धर्म के सम्पर्क में आए. श्रीविजय राजशाही ने चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे. धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक असर इंडोनेशिया पर छाने लगा और कालांतर में हिंदू और बौद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ.

13वीं शताब्दी में अरब के मुस्लिम व्यापारी यहाँ आए और इसके साथ ही ईस्लाम का भी आगमन हुआ. आज यहाँ मुस्लिम आबादी बहुमत में है.

साभार - तरकश
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हिंदू नहीं हैं, तो भारतीय नहीं हो सकते: भागवत

Mon, 03 Oct 2011 14:14:00 +0000

भोपाल।। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जो लोग भारतीय हैं वे हिंदू हैं और अगर कोई व्यक्ति हिंदू नहीं है तो वह भारतीय भी नहीं हो सकता। भारत केवल उसी हालत में तरक्की कर सकता है, जब हिंदुत्व के रास्ते पर चले। यहां संघ के हिंदू समागम कार्यक्रम के अवसर पर भागवत ने कहा कि हमारे लिए हिंदू शब्द का अर्थ किसी धर्म विशेष से नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति से है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपनी स्पीच में चाणक्य को उद्धृत किया था लेकिन वह पूरी तरह संदर्भ से परे था। चाणक्य ने जो कहा वह उस समय के लिए सही था लेकिन आज के भारत के लिए नहीं। आरएसएस प्रमुख ने अमेरिका और चीन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे कई तरीके से भारत के हितों पर चोट पहुंचा रहे हैं। भागवत ने कहा कि एक तरफ जहां चीन घेराबंदी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की हरकतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह सब भारत की दोषपूर्ण नीतियों के कारण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को पाक की हरकतों से सीख लेनी होगी। भारत का बंटवारा सिर्फ शांति के लिए किया गया था, मगर आज वही देश हमारी शांति में खलल पैदा कर रहा है। दुनिया में आज एकाधिकारवाद का दौर चल रहा है। अमेरिका पूरी दुनिया में अपना अधिकार तंत्र फैलाना चाहता है। वह यूरेनियम और बेकार दवाइयां भारत में खपा रहा है और नहीं चाहता कि उसकी बराबरी पर कोई दूसरा देश खड़ा हो।

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परिवारोमें संस्कृत पढ़ना अब आवश्यक हो गया है - श्री. शरद मुन्धडा

Mon, 03 Oct 2011 13:52:00 +0000

02.1.2011: जोधपुर में रविवार को हुए संस्कृत संमेलन में उद्घाटक के रूप में उपस्थित श्री. शरद मुन्धडा ने यह मार्के की बात कही. परिवारोंमे संस्कारोंके ह्रास
के कारण चिंतित अभिभावाकोंका प्रतिनिधित्व करने वाले शरदजी ने जोर देते हुए कहा की यदि संस्कृत घरोंमे बोली जाने लगेगी तो भारतीय संस्करोंकी पुनर्स्थापना संभव होगी.j
               श्री. शरतजी की ही बातों को बल देते हुए संस्कृत भारती के महामन्त्री ने कहाँ कि संस्कृत भाषा पढ़नेसे न केवल संस्करोंका पुनरज्जीवन होगा अपितु ज्ञान भण्डार के द्वार खुल जाएंगे, कारण संस्कृत केवल भाषा नही तो ज्ञानदायिनी है. राष्ट्रिय पाण्डुलिपि mission एक केन्द्र सरकारकी संस्था है. उसके अनुसार भारतमे ४८०० स्थानोंपर पाण्डुलिपियाँ संग्रहित है. कुछ विदेशों मे सुरक्षित है. उन सबको मिलाकर गंथोंकी संख्या कुछ लाख हो जाती है. इस ज्ञानको बाहर निकालनेके लिए  सबको संस्कृत सीखनी पडेगी और जीवन को इसी कार्यमे खपाना पडेगा. जीवनका सबसे महत्वपूर्ण काल ( prime time ) इसीमे लगाना पडेगा.
            कार्यक्रमके अध्यक्ष प्राध्यापक सत्यप्रकाश दुबे - जो जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष है, ने कहा की संस्कृत को लोक भाषा बनाने के लिए ही संस्कृत भारती काम कर रही है. उन्होंने इस वर्ष से आरम्भ हो रही 'सरला संस्कृत परीक्षा' के पाठ्यपुस्तक का लोकार्पण किया. यह परीक्षा अखिल भारतीय स्तर पर हो रही है. जोधपुर क्षेत्र मे १० ओक्टूबर यह आवेदन करनेकी अन्तिम तिथि है. १९ नोवेम्बेर को परीक्षा ली जायेगी. परीक्षा त्रिस्तरीय होगी. पहला स्तर माध्यमिक कक्षाओंका, दूसरा उच्चमाध्यमिक कक्षाओंका एवं तीसरा महाविद्यालयीन कक्षाओंका. पाठ्यपुस्तक के साथ परीक्षा शुल्क मात्र ५० रुपये रखा है. परीक्षा के संचालन हेतु एक राज्यस्तरीय संचालन समिति की घोषणा की गई जिसके मार्गदर्शक बीकानेरवासी माननीय संविद सोमगिरी महाराज है.
           संस्कृत सम्मेलन के पूर्व जोधपुर महानगर मे २७ स्थानोंपर दस दिन के सम्भाषण शिबिर चलाए गए जिनमे लगभग ४०० कि संख्यामे नागरिकोने भाग लिया. कार्यक्रममे वे शिबिरार्थी उपस्थित थे. सम्मेलन मे पंचातंत्र की एक कथा पर नाट्य प्रस्तुति की गई. शिबिरार्थियोने एक सामुहिक संस्कृत गीत गाया. विज्ञान एवं वस्तुप्रदर्शनी दर्शकोंके आकर्षण का केन्द्र बनी. नगरिकोंने हृदय खोलकर संस्कृत साहित्य की खरीददारी की. सरस्वती वन्दना को नन्दिनी ने गाया. अतिथियोंका परिचय महानगर संयोजक श्री. लक्ष्मन सिंह गेहलोत ने किया. जीतेन्द्र के केदार राग मे गाए हुए सुमधुर संस्कृत गीत ने समा बाँधा.
         अन्तमे  प्रान्त मंत्री श्री. तगसिंह राजपुरोहित ने दिसम्बर मासके शीतावाकाश मे होने वाले दो आवासीय भाषा बोधन वर्गोंकी घोषणा की - एक वर्ग जोधपुरमे और एक बिकानेरमे होगा. उसमे सम्भाषण वर्गोंमे भाग लेनेवालोंकोही प्रवेश होगा.   

श्रीश देवपुजारी
अखिल भारतीय मन्त्री
 Samskrit Bharati
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पाकिस्तान में हिंदू व्यापारी की हत्या

Mon, 05 Sep 2011 20:17:00 +0000

इस्लामाबाद।। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक हिंदू व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

समाचार पत्र 'डेली टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक प्रांत की तहसील हुब में हमलावर गोली मारने के बाद घटनास्थल से फरार हो गया। पुलिस ने शव को उनके परिजनों को सौंप दिया है। इसके बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में टायर जलाया गया और क्वेटा-कराची हाईवे को बंद कर हमलावर की गिरफ्तारी की मांग की गई। 

 साभार - नवभारतटाइम
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भारत की भौतिक उन्नति का मार्ग

Sun, 06 Mar 2011 11:33:00 +0000

भारत के सामने हमारे पूर्व राष्ष्ट्रपति श्री. अब्दुल कलाम ने 2020 तक विश्व की आर्थिक एवं सामरिकमहाशक्ति बनने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता केवल आनेवाली पीढ़ी में है ऐसामानकर वे बाल एवं युवकों को श्शिक्षा संस्थानों में जाकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। किन्तु इस तरूणाई को सामुहिकरीति से किस मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए इस विष्षय में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। शासन में बैठाराजकीय दल या विपक्ष दोनों केवल आनेवाले चुनाव तक की सोच रखते हैं। तात्कालिक सोच के श्शिकारनौकरशाह केवल अपने कार्यकाल को चमकाने और उस आधार पर उँचा पद प्राप्त करने के जुगाड में लगे रहतेहैं। यही कारण है कि लगभग दो लाख किसानों द्वारा आत्महत्या करने पर भी देश के नीति निर्धारकों एवंयोजनाओं को क्रियान्वित करने वाले तन्त्रा की नींद टूटी नहीं है। ऐसे में समाज के सभी घटकों को इस लक्ष्यकी प्राप्ति हेतु मार्ग निर्धारण के लिए आगे आना चाहिए।विकसित देशों की कहानी-विश्व के वर्तमान परिदृश्य पर दृष्टि डालें तो विश्व के 204 देशों को सामान्यतः तीन श्रेणियों मेंविभाजित किया गया है। प्रथम श्रेणी का नाम है ‘ विकसित ’ दूसरी का ‘ विकसनशील ’ एवं तीसरी का ‘अविकसित ’ रखा गया है। भारत विकसनशील देश्शों की श्रेणी में आता है। विकसित देशों की श्रेणी के अन्तर्गतएक छोटा गट बना है, जिसका नाम है G8। ये आठ देश सर्वाधिक प्रगत देश माने जाते है। इनके नाम है-अमेरिका, कैनडा, ब्रिटेन, फ्रान्स, जर्मनी, इटली, रशिया और जापान। इन देशों ने विज्ञान और तन्त्राज्ञान के आधार पर प्रगति की है। ये देश विश्व की मण्डी में नये-नये उत्पाद या तकनीक को बेचकर धनार्जन करते हैं।उदाहरण के लिए1. अमेरिका में स[...]



आजादी के बाद पहली बार संघ ने बदला ड्रेस कोड

Sun, 06 Feb 2011 12:30:00 +0000

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नई दिल्ली।। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने कार्यकर्ताओं के ड्रेस कोड में 64 साल बाद कुछ बदलाव करते हुए चमडे़ की जगह साधारण बेल्ट को अपनाने का फैसला किया है लेकिन खाकी निक्कर को पैंट में बदलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने बताया कि बदलाव इस साल मई-जून में संघ शिक्षा वर्ग के आयोजन से लागू होंगे। चमड़े की जगह साधारण बेल्ट के साथ उसका बकल भी अब तांबे की बजाय स्टील का होगा।

यह पूछे जाने पर कि संघ ने बेल्ट के अलावा यूनिफॉर्म में क्या कोई और बदलाव भी किया है? जैसे क्या हाफ पैंट की बजाय फुल पैंट पहनने की अनुमति होगी, जिसकी काफी समय से कुछ कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं, वैद्य ने कहा कि बेल्ट के अलावा कोई और बदलाव नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि अभी तक संघ के लोग चमड़े की जो बेल्ट लगाते थे, उन्हें खासतौर पर कानपुर की उन टेनरियों से लिया जाता था जहां मारे गए जानवरों की खाल का प्रयोग नहीं होता है। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा यह शर्त रखी कि उसे सप्लाई की जाने वाली बेल्ट मारे गए जानवरों की खाल से नहीं बनी होनी चाहिए।

चमड़े की बजाय कृत्रिम पदार्थ की बेल्ट के बदलाव का कारण पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि कुछ सदस्यों, विशेषत: जैन समुदाय के लोगों को चमड़े की बेल्ट पर आपत्ति थी। वे इसे पहनने में असहज महसूस करते थे, भले ही ये बेल्ट मारे गए जानवरों की खाल से नहीं बनी होती थीं। संघ के मंचों से ऐसे सदस्यों की ओर से अक्सर आग्रह होता था कि चमड़े की बेल्ट की जगह कृत्रिम पदार्थ की बेल्ट ली जाए।

संघ के ड्रेस कोड में सबसे पहला बदलाव 1940 में किया गया था। वैद्य ने बताया कि ब्रिटिश काल में हाफ पैंट और कमीज दोनों खाकी रंग की हुआ करती थीं और कमीज पर आरएसएस अंकित तांबे का बिल्ला लगा रहता था। 1940 में इसमें परिवर्तन करके कमीज को खाकी की बजाय सफेद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हाफ पैंट और खाकी कमीज की बजाय खाकी हाफ पैंट के साथ सफेद कमीज ज्यादा ठीक लगती है। प्रचार प्रमुख ने बताया कि दूसरा परिवर्तन 1947 में किया गया। तब तक संघ कार्यकर्ता शाखाओं में एड़ी से ऊंचे लॉन्ग बूट पहनते थे। तब लॉन्ग बूट की बजाय सामान्य काले जूते कर दिए गए और अब 64 साल बाद यह तीसरा बदलाव हुआ है।

वैद्य ने कहा कि संघ हमेशा बदलाव के पक्ष में रहा है। जब भी बदलाव की जरूरत होती है संघ अपने को बदलता है।


sabhar - navbharat times (image)



1188 लोगो का हिन्दू धर्मं में वापसी

Wed, 19 Jan 2011 12:00:00 +0000

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राउलकेला के सापलता गाँव में धर्मं रक्षा संयुक्त संघर्ष समिति के २५० परिवारों के ११८८ लोगो को हिन्दू धर्मं में पुनः वापसी कराई
साभार - प्रभात खबर
अंक - १७ जनवरी २०११, राउलकेला(image)



देश में 20 प्रतिशत से ज्‍यादा मुसलमान तो अल्‍पसंख्‍यक कैसे - स्‍वामी चिन्‍मयानंद (भाग १)

Mon, 17 Jan 2011 12:20:00 +0000

श्री हनुमत शक्ति जागरण समिति, झारखंड के बैनर तले हनुमंत जागरण यज्ञ का जमशेदपुर के एग्रिको में आयोजित किया गया। परम पूज्‍य स्‍वामी चिन्‍मयानंद जी महाराज का बौद्धिक उन्‍हीं के शब्‍दों में हूबहू मैं 36 घंटे की यात्रा कर यहां आया हूं और आप मेरा इतना भी आदर नहीं करेंगे इतनी दूर बैठेंगे। आइये सभी लोग आगे आकर बैठे हां अब ठीक लगा की हिंदू समाज में भी संगठन की शक्ति है। अभी हम अपने एक बुजूर्ग की बात सून रहे थे 81 साल की उम्र में उनका दर्द समझा जा सकता है । वे बटवारें के पहले भारत के उस हिस्‍से में थे जिसे पाकिस्‍तान कहा जाता है। और वो किन परिस्थितियों में यहां पहुंचे वो दर्द आज भी उनके दिल में मौजूद है। हम उसी दर्द का शिकार आगे ना हो इसकी चिंता करने की आवश्‍यकता है। आज जब मैं आसनसोल से चला और झारखंड की सीमा में प्रवेश किया और तमाम अभयारंण्य रास्‍ते में मिले, और उन सभी जगहों में देखा लम्‍बी लम्‍बी कतारे लगी है कारों की मैने पूछा क्‍या हो रहा है भाई इतनी बड़ी संख्‍या में गाड़ियां, कारें क्‍यों ख‍ड़ी हैं। जवाब मिला लोग पिकनीक के लिए आये है, मौज मस्‍ती के लिए आये हैं। हर रविवार हमारा मौज मस्‍ती में बितता है। लेकिन ये मौज मस्‍ती कितने दिन ? आप जानते हैं ? जब इस देश में एनडीए सरकार थी, और मैं केंद्र में गृह राज्‍यमंत्री था उस समय इस देश में 8 राज्‍यों के 55 जिलों में नक्‍सली गतिविधियां थी। लेकिन आज मौज मस्‍ती का नतीजा है कि वो 23 राज्‍यों के 229 जिलों में पहुंच चुका है। आज नेपाल से लेकर कर्नाटक तक रेड कॉरिडोर बन गया है। अंदर बाहर दो ओर से असुरक्षित होता जा रहा है। और आतंक की हर आंधी आतंक का हर तुफान अगर किसी को नुकसान पहुंचाता है तो हिंदु को पहुंच[...]



दिग्विजय सिंह पहले बताओ क्या तुम हिन्दू हो

Mon, 10 Jan 2011 13:36:00 +0000

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का संघ के बारे में एक आलेख राष्ट्रीय सहारा के 25 दिसम्बर के अंक से लिया गया हैं. जिसमे संघ को एक बड़ा खतरा कहा गया हैं. संघ के बारे में ऐसी बाते तो वो बोल देते हैं लेकिन क्या इंडियन मुजाहिदीन या सिमी के बारे में उनका ऐसा विचार हो सकता हैं. नहीं- क्योकि अगर कांग्रेस चुनाव जीतती हैं तो इन संगठनों के मदद से इसकी भी जाँच होनी चाहिए. सीबीआई कांग्रेस के लिए काम करती हैं. लेकिन सब जानकार भी चुप हैं. इस लेख के बारे में अपने विचार जरुर दे संघ सबसे बड़ा खतरादिग्विजय सिंह, महासचिव कांग्रेस महाधिवेशन में संघ परिवार को निशाना बनाने के क्या मायने हैं जबकि साल 2011 के चुनाव में आपको पश्चिम बंगाल और केरल में वामदलों से भिड़ना है, उसके बाद उप्र में बसपा से मुकाबला होना है? कांग्रेस के लिए सिर्फ चुनाव ही सब कुछ नहीं है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा भी है कि कांग्रेस को सिर्फ चुनाव लड़ने की बड़ी मशीन भर नहीं बने रहना है। कांग्रेस के सामने वामपंथियों की भी चुनौती है और क्षेत्रीय दलों की भी चुनौती है। पर इससे कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती संघ परिवार और भाजपा की हिंसा और नफरत फैलाकर देश और समाज को बांटने में लगी विचारधारा से है। संघ परिवार अपने शिशु मंदिरों के जरिये बच्चों को गुमराह कर रहा है और उसने नौकरशाही, पुलिस, खुफिया तंत्र और सेना तक में अपनी पैठ बना ली है। मालेगांव धमाके में सेना के दो अफसरों को धरा गया है, यह किसी से नहीं छिपा। संघ परिवार और भारत देश की एकता के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसलिए महाधिवेशन में उनसे सावधान रहने को कहा गया। आरएसएस को आपने एक तरह से आतंकी संगठनों के बराबर खड़ा करने [...]



विश्व संस्कृत पुस्तक मेले में विज्ञान, महिला एंव शिक्षा की गोष्ठियों का आयोजन

Sun, 09 Jan 2011 12:09:00 +0000

आज दिनांक 8.1.11 को बेंगलुरु में आयोजित विश्व संस्कृत पुस्तक मेले के अन्तर्गत विभिन्न विषयों पर गोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में देशभर से आये विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इन गोष्ठियों में सर्वप्रथम महिला गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें ‘संस्कृत और संस्कृति में महिलाओं के योगदान और उत्तरदायित्व’ इस विषय पर विभिन्न विदुषियों ने अपने विचार रखे। इनमें प्रमुख थीं उत्तराखण्ड के संस्कृत विश्वविद्यालय की उपकुलपति डा. सुधा रानी पाण्डेय, पुणे से डा. सरोजा भाटे, प्रख्यात व्याकरणविद् डा. पुष्पा दीक्षित, राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन की निदेशिका डा. दीप्ति त्रिपाठी, मध्यप्रदेश की माध्यमिकशिक्षामंत्री श्रीमती अर्चना चिटणीस। गोष्ठी में प्रमुख रूप से सभी प्रतिनिधियों ने समाज में संस्कृत भाषा के महत्व और उसकी आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत को एक सर्वांगीण और जनमानस की भाषा बनाने पर जोर दिया। डा. सुधारानी पाण्डे के अनुसार वैदिक युग से ही संस्कृत की सेवा में महिलाएं निरत रही हैं जिसके लिए उन्होंने विभिन्न वैदिक सूक्तों का उदाहरण दिया। डा. पुष्पा दीक्षित ने कहा ‘संस्कृत शिक्षा, विशेषकर व्याकरण के ज्ञान लिये, पाणिनीय विज्ञान को अपनाएं। क्यूंकि इस पद्धति से अत्यन्त अल्प समय में संस्कृत के व्याकरण को समझा जा सकता है।’ मध्यप्रदेश की माध्यमिकशिक्षामंत्री श्रीमती अर्चना चिटणीस ने अपने सीमित संस्कृत ज्ञान पर टिप्पणी करते हुए घोषणा की कि वे वापस जा कर विधिवत् संस्कृत शिक्षा अवश्य लेगीं। ‘समायिक विज्ञान में संस्कृत का महत्व’ विषय पर एक अन्य महत्वपूर्ण गोष्ठी में कर्णाटक राज्य [...]



संस्कृत के गौरव से अभिभूत अनिल कुम्बले

Sun, 09 Jan 2011 12:01:00 +0000

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आज दिनांक 6.1.11 को प्रख्यात क्रिकेट खिलाड़ी अनिल कुम्बले ने बसवनगुड़ी, बेंगलुरू में आयोजित विश्व संस्कृत पुस्तक मेला के अन्तर्गत आयोजित ‘ज्ञानगंगा’ नामक पुस्तक प्रदर्शिनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनके साथ राज्य के शिक्षा मंत्राी विश्वेश्वर हेगडे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी भी उपस्थित थे। अपने उद्घाटन भाषण में अनिल कुम्बले ने संस्कृत की गरिमा के प्रति अपना लगाव व्यक्त करते हुए कहा ‘संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि सभी भाषाओं का मूल आधार है। अपने सीमित संस्कृत ज्ञान पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे संस्कृत को ठीक ढंग से सीखना चाहते हैं ताकि अगली बार अपना भाषण संस्कृत में कर सकें। उपरोक्त अवसर पर राज्य के शिक्षा मंत्राी विश्वेश्वर हेगडे ने संस्कृत ग्राम का उद्घाटन करते हुए उद्घाटन भाषण में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक परम्परा के सम्बन्ध में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा ‘हमारे ऋषिमुनियों का प्राचीन वैज्ञानिक योगदान आजकल के विज्ञान से कम नहीं है। इस तरह की प्रदर्शनी भारत के गांव-गांव में हो जिससे युवा पीढ़ी इसके महत्त्व को समझते हुए संस्कृत के प्रचार और प्रसार में लगे। संस्कृत केवल कुछ ही लोगों की भाषा नहीं है, बल्कि वह एक संस्कृति है जो सभी भारतियों में दिखाई देती है।’ इस अवसर पर उन्होंने कर्णाटक सरकार द्वारा
संस्कृतविश्वविद्यालय की स्थापना की जानकारी देते हुए कहा कि ‘इस संस्कृत मेले का संदेश देश प्रत्येक विद्यालय और शिक्षण संस्थानों में पहुॅंचना चाहिए, जिससे जो संस्कृत की निंदा करते हैं उन्हें सही उत्तर मिले।’
उपरोक्त अवसर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने अपने प्रास्ताविक भाषण में कहा ‘इस अद्वितीय कार्यक्रम को मूर्तरूप देने में संस्था संस्कृत भारती, संस्कृत अकादमी, भारत के संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृतानुरागियों ने जो अथक
प्रयास किया है उसकी मंे हृदय से सराहना करता हूॅं और उन्हें इसकी सफलता के लिए बधाई देता हूॅं।’
इस कार्यक्रम का संचालन डा. रमाकान्त मिश्रा ने किया। अतिथियों का परिचय उज्जैन स्थित कालिदास अकादमी के अध्यक्ष परमेश्वर नारायण
शास्त्राी ने कराया। इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश डा. रामा जोइस भी उस्थित थे।
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एशियाड में कश्मीर बन गया चीन का हिस्सा

Wed, 17 Nov 2010 12:31:00 +0000

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मुकेश शर्मा (बीबीसी संवाददाता, ग्वांगजो से) ग्वांग्जो के मुख्य प्रेस सेंटर में चीन और उसके आस-पास के इलाक़ों का एक मानचित्र लगा हुआ है.
उसके सामने से गुज़रते हुए नज़र अनायास ही भारत के हिस्से की ओर गई तो देखा कि उस क्षेत्र में एक सफ़ेद अलग सा हिस्सा बना है. पास जाकर देखने पर पता चला कि कश्मीर के पूरे हिस्से को सफ़ेद रंग में दिखाया गया था जो कि भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग है.
मगर उस कश्मीर को ध्यान से देखिए और भारत में मिलने वाले भारतीय मानचित्र से उसकी तुलना करिए तो देखेंगे कि कश्मीर के ऊपर का दाहिनी ओर का हिस्सा यहाँ चीन के हिस्से के रूप में दिखाया गया है. यानी अकसाई चिन का हिस्सा चीन ने इस मानचित्र में चीन के हिस्से के रूप में ही दिखाया है.
चीन ने भारतीय कश्मीर के लोगों को पिछले दिनों वीज़ा स्टेपल करके दिया था जिस पर भारतीय सरकार ने आपत्ति भी की है मगर ये मानचित्र भी दिखाता है कि चीन पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता और खेलों के दौरान भी उसकी राजनीति की बुनियादी सोच सामने है.

भारतीय समर्थक
खेलों में राजनीति का एक और उदाहरण भारत और जापान की महिलाओं की टीम के हॉकी मैच के दौरान दिखा. जिन जगहों पर चीन की टीम शामिल नहीं है वहाँ वैसे ही भीड़ ज़्यादा नहीं रहती और इस हॉकी मैच में जो थे भी वे भारत का समर्थन करते नज़र आ रहे थे.
भारतीय टीम जब-जब जापान पर आक्रमण करती भीड़ उत्साहित हो जाती, तालियाँ बजाती और जैसे ही गोल चूक जाते वैसे ही भीड़ से ओह की आवाज़ें आतीं. मुझे लगा कि भारत के इतने समर्थक चीनी लोग कहाँ से आ गए पर तभी समझ आया कि दरअसल यहाँ भारत के समर्थक नहीं बल्कि जापान के विरोधी लोग बैठे हुए हैं.

जापान और चीन के बीच भी कुछ द्वीपों पर नियंत्रण को लेकर कूटनीतिक स्तर पर तनाव है जिसकी वजह से चीन के लोग जापान का विरोध करने के लिए भारत का समर्थन कर रहे थे.



लोकप्रिय लिन डान



बैडमिंटन के चीनी खिलाड़ी लिन डान काफ़ी लोकप्रिय हैं. चीन से बाहर उनकी ये लोकप्रियता उनके खेल को लेकर और चीन में उनके खेल और ख़ुद उनके व्यक्तित्व की वजह से है.



वह लड़कियों के बीच ख़ासे लोकप्रिय हैं मगर उन्होंने कहा है कि फ़िलहाल शादी करने का उनका कोई इरादा नहीं है.



उनकी गर्लफ़्रेंड 2008 में बीजिंग ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली शिए शिंगफ़ेंग हैं मगर लिन का कहना था कि वह अभी काफ़ी युवा है और शादी करना अभी उनकी प्राथमिकता नहीं है.



उनकी इस घोषणा से स्थानीय लड़कियाँ काफ़ी राहत महसूस कर रही हैं क्योंकि भले ही आज लिन की गर्लफ़्रेंड हो मगर कल का क्या भरोसा

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संघ तो कच्चा लोहा हैं जितना गरम करोगे उतना मजबूत होगा

Sun, 14 Nov 2010 10:12:00 +0000

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ हैं. जब संघ को ऐसी प्रतिक्रिया और आरोप झलने पड़ रहे हैं. वास्तविकता यह हैं की जब राजनितिक पार्टिया संघ को आतंकवादी संगठन कहते हैं तो संघ चुप बैठता हैं. लेकिन जब सोनिया गाँधी को पूर्व सरसंघचालक सुदर्शन जी आपतिजनक शब्द कहते हैं तो पूरा राजनितिक दलों से प्रतिक्रिया आनी शुरू हो जाती हैं. हिंदुस्तान में हिन्दू समाज का सबसे बड़ी हितैसी संघ को और बहुत कुछ सहना हैं. संघ को समझने वाले संघ को जानते हैं. संघ क्या कर रहा हैं. अगर आतंकवादी पैदा करता तो आज अटल बिहारी से लेकर गडकरी तक आतंकवादी होते. लेकिन ऐसा नहीं हैं. संघ को पहले समझे फिर प्रतिक्रिया दे. वर्तमान सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने भी कहा हैं की जिन्हें संघ को लेकर कोई भी संका हैं वो एक दिन के लिए संघ की शाखा पर आये.
कुछ प्रतिक्रिया मैंने संकलन किये हैं. इन्हें पढ़े...

सोनिया से मांफी मांगें केसी सुदर्शन : लालू
सोनिया गांधी पर सुदर्शन का बयान आधारहीन : कांग्रेस
ऐसी भाषा बोलने वाले लोग पाप के भागीदार हैं : अशोक गहलोत
सर न उठा पाये संकीणसंघः कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के जनार्दन द्विवेदी
आपत्तिजनक टिप्पणियों से न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रमुख का कद घटा, बल्कि संघ की प्रतिष्ठा को नुकसान भी पहुंचा है : केएन गोविंदाचार्य
सुदर्शन अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं : सिंधिया(image)



पूर्व आरएसएस प्रमुख सुदर्शन का पुतला जलाते कांग्रेस नेता झुलसे

Sun, 14 Nov 2010 10:07:00 +0000

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रमुख के. सी. सुदर्शन का पुतला जलाते समय नगर कांग्रेस अध्यक्ष अजय गुप्ता झुलस गए।

पुलिस के अनुसार कार्यकर्ताओं के साथ श्री गुप्ता श्री सुदर्शन का पुतला जलाने चौराहे पर पहुंचे। पुतले पर पेट्रोल डालते समय कुछ छीटें उनके कपडों पर पड़े। पुतला जलाते समय उनके कपड़ों नें भी आग पकड़ ली जिससे वह झुलस गए।

उल्लेखनीय है कि आरएसएस के पूर्व प्रमुख के सी सुदर्शन ने सोनिया गांधी के खिलाफ अपशब्द कहे थे, जिसके बाद से वे कांग्रेसियों के निशाने पर हैं।(image)






ये खबरे मीडिया में क्यूँ नहीं आती

Mon, 27 Sep 2010 20:49:00 +0000

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Pictorial message of Deganga for the secularist politician, media and the intelligentsia of India.


Deganga Riot Pics – September 2010
Below are the pictures of the Deganga Riots collected by the Hindu Samhati Investigation team.(image)



इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय

Mon, 09 Aug 2010 12:06:00 +0000

इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय ,इसके पूरे संदर्भ मैं ये एक संपूर्ण 100 प्रतिशत जीवन जीने का एक तरीका है.इस्लाम मैं धार्मिक,कानूनी,राजनीतिक,आर्थिक सामाजिक व सामरिक पहलू है.किसी भी देश मैं इस्लामी करण का प्रारंभ होता है जब पर्याप्त मात्रा मैं मुस्लिम जनसंख्या होती है और वे इसके लिए उग्रता दिखाने की स्थिति मैं होते हैं और जब राजनीतिक रूप से जागरूक और सहनशील समाज मुस्रलिमों की कुछ धार्मिक बातों को मान लेते हैं तब उनकी कुछ और मांगें धीरे से आगे आजाती है…….ये किस तरह काम करता है…. उस देश मैं हो जब तक मुस्लिम जनसंख्या 2 प्रतिशत या कम हो तो मुस्लिम समाज एक शांतिप्रिय समाज है जो किसी भी प्रकार से अन्य नागरिकों के लिए खतरा नहीं दिखाई देता है जैसा कि ….United States -- Muslim 0.6%,Australia -- Muslim 1.5%,,canada -- Muslim 1.9%,China -- Muslim 1.8%,Italy -- Muslim 1.5%,Norway -- Muslim 1.8%जब ये जनसंख्या 2-5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तब धर्मांतरण प्रारंभ होता है,जो अक्सर अन्य धर्म के अल्पसंख्यकों और जैलों मैं अलग थलग पङे लोगों से होता है ….जैसा कि निम्नांकित है…..Denmark -- Muslim 2%,Germany -- Muslim 3.7%,United Kingdom -- Muslim 2.7%,Spain -- Muslim 4%,Thailand -- Muslim 4.6%,प्रतिशत से ज्यादा होने पर ये अपनी जनसंख्या के अनुपात से ज्याद मांगे रखना शुरु कर देते है……जैसे वे हलाल के मांस की मांग करेंगे एक तरह से जोब सिक्यूरिटी हो गई मुस्लिमों की खाने की इंडस्ट्री मैं…..सुपरमार्केट्स पर हलाल के मांस के अलग स्टाल लगाने का दबाव बनाया जाता है अन्यथा उनके बहिष्कार की धमकियां दी जाती हैजैसा कि निम्न देशों मैं हो रहा है……France -- Muslim 8%,Philippines -- Muslim 5%,Sweden -- Muslim 5%,Switzerland -- Muslim 4.3%,The Netherlands -- M[...]